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वसीयत और नसीहत


एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, 

बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना ।

पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।

पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है।

पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो ।

बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।

इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी

मेरे प्यारे बेटे
देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।

एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।

लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।

सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"। लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भागता रहता है जब तक उसका निधन नहीं हो जाता।

जो आपसे दिल से बात करता है उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना।

एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है। 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है।

एक वक्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक्त आएगा और एक ये वक्त है कि हम सोचते हैं कि वो भी क्या वक्त था।

एक मिनट मे जिन्दगी नहीं बदलती पर एक मिनट सोच कर लिया फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है।

आप जीवन में कितने भी ऊॅचे क्यों न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए।

वाणी में भी अजीब शक्ति होती है। कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती ह

Adsense vs adnow Full Review – अपने वेबसाइट के Income कैसे बढ़ाएं


नमस्कार दोस्तों! आज का यह पोस्ट उन Newbie Bloggers दोस्तों के लिए है जो अपने वेबसाइट पर Adsense के Ads तो इस्तेमाल कर रहे हैं पर उन्हें अच्छा Income नहीं हो रहा है। Adsense से अच्छा Income ना होने का बहुत कारण हो सकता है पर अगर आप Adsense के साथ Native Ads का उपयोग करेंगे तो आसानी से अपने Website के Revenue को 50% तक बढ़ा सकते हैं। www.adnow.com/?referral=248880

Native Ads क्या हैं?
Native Ads ऑनलाइन विज्ञापन के क्षेत्र में एक नया Ads Technique है जो किसी भी Platform के आकार को और क्रियाशीलता के हिसाब से Website पर दीखता है। शब्द Native का मतलब ही होता “मेल या जुटना”, यानि की ये Ads आपके Website के Content से मिलते झूलते होते हैं। www.adnow.com/?referral=248880

ज्यादातर ब्लॉगर का Website से Income Source , Adsense होता है पर कुछ New Bloggers अपने Adsense के Ads से ज्यादा पैसे कमाने के लिए एक ही Page या Post में 7-8 Ads Place कर देते हैं जिसके कारन उनका Income बढ़ता तो नहीं है कम हो जाता है ज्यादा Ads Impression और कम Clicks होने के कारण।. www.adnow.com/?referral=248880

पर अगर आपक Native Ads को देखें तो ये आपके Content के साथ मेल भी खाते हैं और इसका CTR भी बहुत अच्छा होता है। सबसे बड़ी बात अगर आप Native Ads को अपने Post के ऊपर या नीचे Publish करेंगे तो इससे आपके Readers को भी Problem नहीं होगा। www.adnow.com/?referral=248880

नए Bloggers के लिए Adnow ही ऐसी Company है जो Adsense के साथ Easy और Safe तरीके से Put किया जा सकता है। www.adnow.com/?referral=248880

Adnow की शुरुवात 2014 में हुई थी। यह Advertising कंपनी Ads Publish करने के लिए Widgets Provide करती है। इस कंपनी के 15000+ Publishers आज के दिन में मौजूद हैं और इसकी गिनती दिन ब दिन बढ़ते चले जा रहा है। www.adnow.com/?referral=248880

Adnow कैसे काम करता है?
जैसे की हम बता चुके हैं Adnow एक Content Matched Network है। यह Network खासकर Related Post Widgets प्रदान करता है जो आप अपने Site पर Place कर सकते हैं। Publisher उस Website पर Put किये हुए Widget के दिखने और Clicks होने पर Revenue Earn करते हैं। www.adnow.com/?referral=248880
Adnow को आप सुरक्षित Safe तरीके से Adsense के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। 

Adnow की कुछ अच्छीं बाते
यह Non-English वेबसाइट भी Support करता है जैसे Hindi या अन्य भारतीय भाषएँ और दुसरे देशों की भाषएँ भी। www.adnow.com/?referral=248880

आप सुरक्षित रूप से अन्य Ad Network के साथ इसे Use कर सकते हैं जैसे Adsense, Propeller Ads, और Media.Net

किसी भी Website के लिए कोई Minimum Traffic Limit नहीं है।

Adnow की Support System बहुत ही Fast Reply और अच्छा हैं।

इसका Payment System भी बहुत अच्छा है। Payment Methods जो Available है – PayPal, Bank Wire Transfer. आप चाहें तो Payments Weekly Withdraw करवा सकते हैं। इसके लिए Minimum Payout Threshold $20 है। www.adnow.com/?referral=248880

Referral Program की सुविधा
Adnow अपने Publishers को कुछ Extra पैसे कमाने के लिए Referral Syatem की सुविधा भी प्रदान करती है। इसमें जब आप किसी अन्य व्यक्ति को Refer करते हैं तो उसके Earnings में से 5% आपको 12 महीने तक दिया जायेगा।. www.adnow.com/?referral=248880


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मेरी दौड से ना जाने कितने की आबरू बच गई! Hindi story


मेरी दौड से ना जाने कितने की आबरू बच गई! Hindi story

ट्रेन को पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा था क्योंकि बिना टिकट वालों की चेकिंग हो रही थी !! 

इतने में एक सरदार जी ट्रेन से कुदे और लगे भागने उनको भागते देख सभी पुलिस वाले , मजिस्ट्रेट सब उसको पकडने दौडे देखते ही देखते सरदार जी के साथ कई लोग भागने लगे ,


चुंकि सभी पुलिस वालों और मजिस्ट्रेट का ध्यान सरदार जी की तरफ था इसलिए दुसरों के उपर किसी का ध्यान नहीं गया !!

अंत में सरदार जी को पकडा गया लेकिन साथ दौडने वाले भाग निकले  फिर पुलिस वालों ने सरदारजी से टिकट दिखाने को कहा

सरदार जी ने जेब से तुरंत टिकट निकाला और मजिस्ट्रेट के हाथों में रख दिया ! 

सभी हक्के बक्के ,

मजिस्ट्रेट ने चिल्लाकर पुछा जब तेरे पास टिकट थी तो तुम भागे क्यों ? 

सरदार जी मौन रहे हल्के से मुस्कराते रहे !! 

जब मजिस्ट्रेट ने ज्यादा जोर देकर पुछा तो सरदार जी ने मुंह खोला और कहा "हजारों सवालों से अच्छी है मेरी दौड, ना जाने कितने बेटिकटों की आबरू बच गई " !!!!

मतलब सरदार जी तो ईमानदार रह गए लेकिन कई घोटाले बाज़ों को अपने ईमानदारी के सर्टिफिकेट से बचा ले गए।।  
                            
इस कहानी का रेन कोट पहनकर नहाने से कुछ लेना देना नहीं है।।


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एग्ज़ॅम की तेयारी कैसे करे







एग्ज़ॅम की तेयारी कैसे करे

आज जिस तरह से हर कोई युवा (Yuva) कोई न कोई compition का exam दे रहा है और सभी लोग सफलता की race में लगे हुए है. कुछ लोग इस race में सफलता प्राप्त कर लेते है तो कोई इस race में पीछे छूट जाता है और असफल हो जाता है.

सफलता हासिल करने का पहला मन्त्र है कड़ी मेहनत. कड़ी मेहनत (Kadi mehanat) का कोई शॉर्टकट नहीं होता. प्रतियोगी परीक्षाओ में अगर आप सफल होना चाहते है तो, आपको अपना सर्वश्रेष्ठ (Best)देना होगा. प्रतियोगी परीक्षाओ में सफल होने वाले student अपनी कमियों को दूर करते हुए सिलेबस के अनुरूप पढाई करते है.

अगर आप कुछ बातों को ध्यान में रखकर प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करते है तो उन्हें सफलता अवश्य मिलती है. इसलिए यहाँ पर आपको कुछ खास tips दिए जा रहे है जिन्हें आपको अपनी life में जरुर follow करना है.

— प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करे—

क्वालिटी पढाई है जरुरी- Quality education is essential:

परीक्षा हाँल में सभी student को एक ही तरह के प्रश्नपत्र मिलते है. सभी student से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है. अगर आप भी परीक्षा हाँल में बेहतर performance करना चाहते है तो सबसे पहले पढाई के घंटो को गिनने के बजाय अपनी quality study पर जोर दे.

किसी भी परीक्षा की तैयारी के दौरान नकारात्मक विचारो (negative thought) से दूर रहे. हमेशा pasitive thinking रखे. कई घंटे पढाई करने से अच्छा है की कुछ घंटे ध्यान लगाकर पढाई करे. माना अगर आप 10 से 12 घंटे पढ़ते है और आपको इन 12 घंटो में सिर्फ 50% ही आये तो यह गलत है.

कुछ देर ही सही पर मन को एकाग्र रखकर पढाई करे. हमेशा खुश रहने की कोशिश करे, यह आपको तनाव से भी बचाएगा. इससे पढाई में मन लगेगा और आप बेहतर performance देने में कामयाब होंगे.

पिछले प्रश्नपत्रो के अनुरूप करे तैयारी- Consistent with the previous question papers set:

आज का समय Tough Competition का समय है. यह career में नई ऊंचाइयां हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने का भी दौर है. career चाहे M.B.A. में बनाना हो, I.I.T. में बनाना हो या Hotel managment में या other, आज हर student के लिए जरुरी है Mental Toughness. इसके अभाव में कई student जल्दी हताश (Hatash) और निराश (Nirash) हो जाते है.

इसलिए आज के दौर में मानसिक तौर पर मजबूत होना बहुत जरुरी है. यह तभी संभव हो सकेगा, जब आप सम्बन्धित परीक्षा की तैयारी अच्छी तरह से करेंगे. अगर आपको प्रतियोगी परीक्षा में अच्छी तैयारी करनी है, तो आपके लिए जरुरी है की आप इस परीक्षा में पूछे गये पिछले 10 वर्षो के प्रश्नों को एकत्रित करे.

अगर आप किसी भी परीक्षा में पूछे गये पिछले 10 वर्षो के प्रश्नों का गहन अध्ययन करते है, तो आपका confidence leval और सोच का दायरा काफी Stronge हो जायेगा और आप अपनी कमियों को भी अच्छी तरह से जान जायेंगे.

किसी भी उपलब्धि (Achivment) को पाने के लिए आपको ऊँची छलांग लगाने की जरुरत पड़ती है. हो सकता है की आप दुनिया के सबसे तेज और प्रतिभाशाली व्यक्ति न हो, किन्तु लगातार मेहनत (Hard Work) करे तो सफलता किसी भी कीमत पर आपकी ही होगी.

इस दुनिया में हमारी जीत निरंतर प्रयत्नशीलता पर ही टिकी है. सफलता एक निरंतर चलने वाला अभ्यास है. अगर आप अपनी कमियों को पहचानते हुए उसे निरंतर सुधारते चलेंगे तो आप किसी भी परीक्षा में Succes प्राप्त कर सकते है.

सिलेबस पर करे फोकस- The syllabus should focus on:

हर परीक्षा में प्रश्न सिलेबस के अनुसार ही पूछे जाते है. आपके लिए बेहतर होगा की आप जिस परीक्षा की तैयारी कर रहे है, उसके सिलेबस का गहन अध्ययन (in-depth study) करे. अगर आप सिलेबस के अनुरूप study करते है, तो आप परीक्षा हाँल में better करने में अवश्य कामयाब (Kamyab) होंगे. अक्सर student सिलेबस को ignor करके shortcut अपनाते है.

इस तरह के Student पढाई करने के बावजूद अपने लक्ष्य नहीं प्राप्त कर पाते है. अगर आपको सफल होना है, तो आपको सिलेबस में command किसी भी हालत में करना ही होगा. अगर इस तरह की सोच रखकर आप किसी भी परीक्षा (Pariksha) की तैयारी करते है, तो आपको सफल (Safal) होने से कोई नहीं रोक सकता है.

बारीक़ घटनाओ पर रखे नजर- Keep an eye on the fine events:

आजकल की सभी परीक्षाओ में करेंट (Current) से सम्बन्धित प्रश्नों की संख्या काफी होती है. इस कारण इसे ignor नहीं किया जा सकता है. अगर आपको प्रतियोगी परीक्षा (Pratiyogi Parikshao) में सफल होना है तो आप daily के 2 घंटे करेंट की तैयारी पर दे. इसे आप नियमित दिनचर्या में शामिल करे. आप अख़बार पढने के साथ ही न्यूज़ चैनल (News Channel) अवश्य देखे.

इसके साथ ही बाजार में करेंट अफेयर्स (Current Affairs) से related कई पुस्तके उपलब्ध (Books Availble) है. आप किसी एक पुस्तक की नियमित पढाई करे. अगर आप इस तरह की रणनीति अपनाते है, तो आपकी तैयारी कुछ महीनो में ही बेहतर हो जाएगी और आप औरो के मुकाबले अच्छी स्थिति में होंगे.

अभ्यास है सफलता की कुंजी- Practice the key to success:

अगर आप objective type की परीक्षा दे रहे है तो आपके लिए Time management अहम है. इसके अभाव में आप किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते है. यह एक दिन में संभव नहीं है. यह तभी संभव है, जब आप इसका निरंतर अभ्यास (Constant practice) करते है.

आपके लिए बेहतर होगा की आप जिस परीक्षा की तैयारी कर रहे है, सिलेबस (Syllabus) के अनुसार पहले उसकी तैयारी करे और तैयारी हो जाने के बाद पिछले 10 वर्षो के प्रश्नों को लेकर निर्धारित समय-सीमा के अन्दर खूब अभ्यास करे. पिछली परीक्षा में पूछे गये प्रश्नों का अभ्यास करने से आपको परीक्षा पैटर्न के बारे में जानकारी होगी और समय रहते अपनी कमियों को जानने का अवसर भी मिलेगा.

अगर आप अपनी कमजोरियों को जानकर समय रहते उसे दूर कर लेते है और उसके बाद परीक्षा देते है तो आपके सफलता के चांसेज (Chances)काफी बढ़ जाते है. बेहतर स्ट्रेटजी (Better Strategy) यह है की आप सबसे पहले उन्ही प्रश्नों को हल करे, जिन्हें अच्छी तरह से आप जानते है.

इसके अलावा भी इन बातो पर ध्यान दे- Also pay attention to these things:

*शुरुआत में ही यह सोच ले की आपको किस क्षेत्र में career बनाना है, उस क्षेत्र में सफलता के लिए जुट जाये.

*पूर्ण समर्पण (Dedication) के साथ पढाई करे. कोचिंग के अलावा घर पर भी पढाई करे.

*स्वयं का आत्मविश्वास (Self-confidence) बनाये रखे. खुद पर किसी भी प्रकार का दबाव न आने दे.

*अपनी कमजोरियो को खोजे और उन्हें दूर करने का प्रयास करे.

*टापिक्स को रटने के बजाय समझकर पढने की कोशिश करे.

*पढाई में निरन्तरता रखे. रेग्युलर पढाई करने से वह बौझिल महसूस नहीं होती है.

*किसी Competitive exam की तैयारी प्लानिंग से करे ताकि रिविजिन में परेशानी न आये.

*तनाव से बचे. खुद को तनावमुक्त रखने के लिए अपने हॉबी (Hobby) के अनुसार कोई स्पोर्ट्स या मनोरंजन करे.

Friends, प्रतियोगी परीक्षाओ (competitive exam) में आपको अगर सफलता (Succes) पानि है तो आपको ऊपर दिए गये सारी बातो को अपने पढाई (Study) में शामिल करना होगा और इन बातो को पूरी सिद्दत से अपनाना होगा.जिस तरह से आज का समय कुछ diffrent करने का समय है तो आपको भी इस race में उतरना होगा और जीत हासिल करनी होगी.

आप यह ध्यान रखे की जिस व्यक्ति में काबिलियत होती है और जिस व्यक्ति को खुद की क्षमताओ पर अटूट विश्वास होता है उस व्यक्ति को किसी भी exam या life में सफलता मिलनी निश्चित होती है.

अगर आप में महान लोगो जितना Telent नहीं भी है तो यह कोई हार मान लेने वाली बात नहीं है. आपको अपनी सोच का दायरा बढ़ाना चाहिए और अपनी सोच को एक नया आयाम देना चाहिए. सफल होना कोई नामुमकिन वाली बात तो है नहीं.

महान लोगो (Mahan Logo) ने इसे कई बार साबित भी किया है की इस दुनिया में कुछ भी असंभव (Imposible) नहीं. इसलिए इस बात में यकीन करना शुरू कर दे की आप भी सफल होकर दिखायेंगे और जिस दिन आपने सफल होने की ठान ली उस दिन आपको Succes प्राप्त करने से कोई रोक नहीं पायेगा और आप सफलता का एक नया इतिहास (History) लिख देंगे.


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भारतीय रेल का इतिहास, History of Indian Railways



भारतीय रेल का इतिहास, 

History of Indian Railways

भारत में सबसे पहले मुंबई से ठाणे के बीच रेलगाड़ी चली। तारीख व सन् था 16 अप्रैल 1853। इस 35 किमी के सफर का जोरदार शुभारंभ किया गया था। भाप के इंजन के साथ 14 डिब्बों की रेलगाड़ी मुंबई से ठाणे के बीच रवाना हुई थी।

भारतीय रेलवे का नेटवर्क 64 हजार 15 किमी से ज्यादा लंबा है। कोई 15 हजार रेलगाड़ियां इस नेटवर्क पर दौड़ती हैं। इस नेटवर्क पर 6 हजार से ज्यादा स्टेशन हैं। करीब 2 करोड़ लोग रोज रेल‍गाड़ियों के माध्यम से इधर से उधर आते-जाते हैं।

भारतीय रेलवे का नेटवर्क दुनिया में अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है। हां, यह बात जरूर है कि तकनीक के मामले में ये तीनों देश भारत से कुछ या बहुत आगे हैं, किंतु भारतीय रेलवे भी इनसे एकदम उन्नीस भी नहीं है, बीस ही है।

भारत में सबसे पहले रेल 1853 में दौड़ी थी, जबकि चीन में इसके 23 साल बाद यानी 1876 में। जब भारत आजाद हुआ तो भारत में रेल नेटवर्क की कुल लंबाई 53,596 किमी थी, जबकि चीन का रेल नेटवर्क सिर्फ 27,000 किमी ही था।

आजादी के इन 65 वर्षों में भारत में केवल 10,000 किमी की या उसे कुछ ही अधिक बढ़ोतरी हो पाई है, जबकि चीन 78,000 किमी के रेल नेटवर्क के साथ भारत से काफी आगे निकल गया है तथा उसका रेल नेटवर्क भारत की तुलना में फैलता ही जा रहा है। उसने ठेठ तिब्बत तक रेल लाइन डाल दी है

भारतीय रेलवे मुख्यालय एवं स्थापना दिवस :-

1. उत्तर रेलवे (उरे) 14 अप्रैल — 1952 दिल्ली

2. पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) –1952 गोरखपुर

3. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) –1958 गुवाहाटी

4. पूर्व रेलवे (पूरे) — अप्रैल 1952 कोलकाता

5. दक्षिण-पूर्व रेलवे (दपूरे) — 1955 कोलकाता

6. दक्षिण-मध्य रेलवे (दमरे)–2 अक्टूबर 1966 सिकंदराबाद

7. दक्षिण रेलवे (दरे) –14 अप्रैल 1951 चेन्नई

8. मध्य रेलवे (मरे) –5 नवंबर 1951 मुंबई

9. पश्चिम रेलवे (परे) –5 नवंबर 1951 मुंबई

10. दक्षिण-पश्चिम रेलवे (दपरे) –1 अप्रैल 2001 हुबली

11. उत्तर-पश्चिम रेलवे (उपरे) –1 अक्टूबर 2002 जयपुर

12. पश्चिम-मध्य रेलवे (पमरे) –1 अप्रैल 2003 जबलपुर

13. उत्तर-मध्य रेलवे (उमरे) –1 अप्रैल 2003 इलाहाबाद

14. दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (दपूमरे) –1 अप्रैल 2003 बिलासपुर

15. पूर्व तटीय रेलवे (पूतरे) –1 अप्रैल 2003 भुवनेश्वर

16. पूर्व-मध्य रेलवे (पूमरे) –1 अक्टूबर 2002 हाजीपुर

17. कोंकण रेलवे (केआर) –26 जनवरी 1998 नवी मुंबई

प्रमुख रेल संग्रहालय एवं स्थापना दिवस :-

1. 1 फरवरी 1977  नई दिल्ली
2. 2 जून1979     मैसूर
3. 31 मार्च 2002  चेन्नई
4. 14 दिसंबर 2002  नागपुर

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भारतीय रेलवे प्रश्नोत्तरी :- 

1. भारत में पहली रेल कब चली थी   -  16 अप्रैल 1853 दोपहर 3:35, दुरी 35 किमी

2. भारत में पहली रेल कहाँ से कहाँ तक चली थी     -     बॉम्बे से ठाणे

3. भारत के पहले रेलवे सुरंग का क्या नाम है   -    पारसिक सुरंग

4. भारतीय रेलवे का विश्व में कौन सा स्थान है   -    दूसरा

5. भारतीय रेलवे का एशिया में कौन सा स्थान है    -     पहला

6. भारत के पहले रेलवे पूल का क्या नाम है   -   डैपूरी वायाडक्ट (मुंबई-ठाणे रूट पर)

7. भारत का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड कहाँ है   -    मुग़ल सराय

8. भारत का सबसे ज्यादा अक्षरों वाला रेलवे स्टेशन   -  श्री वेंकटानरसिम्हाराजूवरियापेटा (तमिलनाडु)

9. भारत का सबसे कम अक्षरों वाला रेलवे स्टेशन    -    आईबी (उड़ीसा)

10. भारत में पहली इलेक्ट्रिक रेल कब चली     -    3 फरवरी 1925

11. भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन कहाँ से कहाँ तक चली     -    बॉम्बे वीटी से कुर्ला

12. भारत का सबसे लम्बा रेलवे पूल कौन सा है    -    नेहरू सेतु (100,44 फीट) जो की सोन नदी पर बना है

13. भारत का सबसे व्यस्तम रेलवे स्टेशन कौन सा है    -     लखनऊ

14. भारत की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन का क्या नाम है    -     शताब्दी एक्सप्रेस

15. भारत का सबसे पुराना चालू इंजन कौन सा है      -     फेयरी क्वीन

16. भारत की सबसे रेलवे सुरंग कौन सी हैं    -    कोंकण रेल लाइन पर कारबुडे सुरंग (6.5 किलोमीटर)

17. भारत का ही नहीं अपितु विश्व का सबसे लम्बा प्लेट्फॉर्म कहाँ है    -     ख़ड़गपुर (2733 फीट)

18. भारत की सबसे लम्बी दूरी तय करने वाली ट्रेन कौन सी है     -    हिमसागर एक्सप्रेस जम्मू तवी से कन्याकुमारी

19. भारत में पहली मेट्रो ट्रेन कहाँ चली    -      कलकत्ता

20. भारतीय रेलवे का शुभंकर कौन है     -    भोलू हाथी

21. सबसे कम दूरी तय करने वाली शताब्दी एक्सप्रेस कौन सी है   -    नई दिल्ली – कालका शताब्दी एक्सप्रेस

22. पहली राजधानी एक्सप्रेस कब चलाई गयी    -     1969 नई दिल्ली  से हावड़ा

23. पहली शताब्दी एक्सपेस कहाँ से कहाँ तक चली    -    नई दिल्ली से झांसी

24. शताब्दी ट्रेनों का सञ्चालन किस व्यक्ति के जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में शुरू हुआ   -     पंडित जवाहर लाल नेहरू

25. भारत में रेल चलने की सर्वप्रथम परिकल्पना कहाँ की गयी थी    -    मद्रास (वर्तमान चेन्नई )1832

26. सर्वप्रथम रेलवे बजट किसके द्वारा प्रस्तुत किया गया था     -     जॉन मथाई
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सती प्रथा का जन्म कैसे हुआ, सति प्रथा की ईतिहास,


सती प्रथा का जन्म कैसे हुआ, सति प्रथा की ईतिहास,

भारत में कभी सति प्रथा थी ही नही, रामायण / महाभारत जैसे ग्रन्थ कौशल्या, कैकेई, सुमित्रा, मंदोदरी, तारा, सत्यवती, अम्बिका, अम्बालिका, कुंती, उत्तरा, आदि जैसी बिध्वाओं की गाथाओं से भरे हुए हैं। 

किसी भी प्राचीन ग्रन्थ में सति-प्रथा का कोई उल्लेख नहीं है. यह प्रथा भारत में इस्लामी आतंक के बाद शुरू हुई थी। ये बात अलग है कि- बाद में कुछ लालचियों ने अपने भाइयों कि सम्पत्ति को हथियाने के लिए अपनी भाभियों की ह्त्या इसको प्रथा बनाकर की थी।

इस्लामी अत्याचारियों द्वारा पुरुषों को मारने के बाद उनकी स्त्रीयों से दुराचार किया जाता था, इसीलिये स्वाभिमानी हिन्दू स्त्रीयों ने अपने पति के हत्यारों के हाथो इज्जत गंवाने के बजाय अपनी जान देना बेहतर समझा था। 

भारत में जो लोग इस्लाम का झंडा बुलंद किये घूमते हैं, वो ज्यादातर उन वेवश महिलाओं के ही वंशज हैं जिनके पति की ह्त्या कर महिला को जबरन हरम में डाल दिया गया था। 

इनको तो खुद अपने पूर्वजों पर हुए अत्याचार का प्रतिकार करना चाहिए।
सेकुलर बुद्धिजीवी "सतीप्रथा" को हिन्दू समाज की कुरीति बताते हैं 

जबकि यह प्राचीन प्रथा है ही नहीं. रामायण में केवल मेघनाथ की पत्नी सुलोचना का और महाभारत में पांडू की दुसरी पत्नी माद्री के आत्मदाह का प्रसंग है। इन दोनो को भी किसी ने किसी प्रथा के तहत बाध्य नहीं किया था बल्कि पति के वियोंग में आत्मदाह किया था।

चित्तौड़गढ़ के राजा राणा रतन सेन की रानी "महारानी पद्मावती" का जौहर विश्व में भारतीय नारी के स्वाभिमान की सबसे प्रसिद्ध घटना है। 

ऐय्याश और जालिम राजा "अलाउद्दीन खिलजी" ने रानी पद्मावती को पाने के लिए, चित्तौड़ पर चढ़ाई कर दी थी , राजपूतों ने उसका बहादुरी से सामना किया। हार हो जाने पर रानी पद्मावती एवं सभी स्त्रीयों ने , अत्याचारियों के हाथो इज्ज़त गंवाने के बजाय सामूहिक आत्मदाह कर लिया था. जौहर /सती को सर्वाधिक सम्मान इसी घटना के कारण दिया जाता है।

चित्तौड़गढ़, जो जौहर (सति) के लिए सर्वाधिक विख्यात है उसकी महारानी कर्णावती ने भी अपने पति राणा सांगा की म्रत्यु के समय (1528) में जौहर नहीं किया था, बल्कि राज्य को सम्हाला था। महारानी कर्णावती ने सात साल बाद 1535 में बहादुर शाह के हाथो चित्तौड़ की हार होने पर, उससे अपनी इज्ज़त बचाने की खातिर आत्मदाह किया था।

औरंगजेब से जाटों की लड़ाई के समय तो जाट स्त्रियों ने युद्ध में जाने से पहले, अपने खुद अपने पति से कहा था कि उनकी गर्दन काटकर जाएँ।

गोंडवाना की रानी दुर्गावती ने भी अपने पति की म्रत्यु के बाद 15 बर्षों तक शासन किया था। दुर्गावती को अपने हरम में डालने की खातिर जालिम मुग़ल शासक "अकबर" ने गोंडवाना पर चढ़ाई कर दी थी। रानी दुर्गावती ने उसका बहादुरी से सामना किया और एक बार मुग़ल सेना को भागने पर मजबूर कर दिया था। दुसरी लड़ाई में जब दुर्गावती की हार हुई तो उसने भी अकबर के हाथ पकडे जाने के बजाय खुद अपने सीने में खंजर मारकर आत्महत्या कर ली थी।

"सती" का मतलब होता है, अपने पति को पूर्ण समर्पित पतिव्रता स्त्री। सती अनुसूइया, सती सीता, सती सावित्री, इत्यादि दुनिया की सबसे "सुविख्यात सती" हैं और इनमें से किसी ने भी आत्मदाह नही किया था। जिनके घर की औरते रोज ही इधर-उधर मुह मारती फिरती हों, उन्हें कभी समझ नहीं आ सकता कि - अपने पति के हत्यारों से अपनी इज्ज़त बचाने के लिए, कोई स्वाभिमानी महिला आत्मदाह क्यों कर लेती थी।

हमें गर्व है भारत की उन महान सती स्त्रियों पर, जो हर तरह से असहाय हो जाने के बाद, अपने पति के हत्यारों से, अपनी इज्ज़त बचाने की खातिर अपनी जान दे दिया करती थीं। जो स्त्रियाँ अपनी जान देने का साहस नहीं कर सकी उनको मुघलों के हरम में रहना पडा। 

मुग़ल राजाओं से बिधिवत निकाह करने वाली औरतों के बच्चो को शहजादा और हरम की स्त्रियों से पैदा हुए बच्चो को हरामी कहा जाता था और उन सभी को इस्लाम को ही मानना पड़ता था।

जिस "सती" के नाम पर स्त्री के आत्मबलिदान को "सती" होना कहा जाता है उन्होंने भी पति की म्रत्यु पर नहीं बल्कि अपने मायके में अपने पति के अपमान पर आत्मदाह किया था। 

शिव पत्नी "सती" द्वारा अपने पति का अपमान बर्दास्त नहीं करना और इसके लिए अपने पिता के यग्य को विध्वंस करने के लिए आत्मदाह करना , पति के प्रति "सती" के समर्पण की पराकाष्ठ माना गया था। 

इसीलिये पतिव्रता स्त्री को सती कहा जाता है, जीवित स्त्रियाँ भी सती कहलाई जाती रही है।

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कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं.





कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं. hindi story




कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था| वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था| प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी| एक दिन राजा गुप्त वेष में अपने राज्य में घूमने निकला तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है| 

राजा कौतूहलवश उसके पास गया और बोला, ‘‘यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?’’ वृद्ध ने धीमें स्वर में कहा, ‘‘आम का|’’ 

राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा| हिसाब लगाकर उसने अचरज से वृद्ध की ओर देखा और कहा, ‘‘सुनो दादा इस पौधै के बड़े होने और उस पर फल आने मे कई साल लग जाएंगे, तब तक तुम क्या जीवित रहोगे?’’ वृद्ध ने राजा की ओर देखा| राजा की आँखों में मायूसी थी| उसे लग रहा था कि वह वृद्ध ऐसा काम कर रहा है, जिसका फल उसे नहीं मिलेगा| 

यह देखकर वृद्ध ने कहा, ‘‘आप सोच रहें होंगे कि मैं पागलपन का काम कर रहा हूँ| जिस चीज से आदमी को फायदा नहीं पहुँचता, उस पर मेहनत करना बेकार है, लेकिन यह भी तो सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है ? दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ? क्या उस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए? क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें? जो केवल अपने लाभ के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी वृत्ति का मनुष्य होता है|’’ 

वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा प्रसन्न हो गया , आज उसे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला था ! 



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रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी।


रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी।

भारत कई अनूठी कहानियों और घटनाओं का साक्षी रहा है. यहां हर मोड़ पर कुछ ना कुछ ऐसा सुनने को जरूर मिल जाता है जो आपको हैरान कर देता है कि क्या वाकई ऐसा हो सकता है 

आज हम आपको ऐसे ही एक स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी अमर प्रेम कहानी के लिए जाना जाता है. ऐसी कहानी जो आज कई सदियों बाद भी ना सिर्फ याद की जाती है बल्कि आज के भौतिकवाद से ग्रस्त समाज में जहां प्यार को बस एक खेल की तरह खेला जा रहा है वहां प्यार के उस एहसास से रूबरू करवाती है जिसके लिए कभी लोग अपनी जान तक दे दिया करते थे.

यह कहानी मांडू की रानी रूपमती और बाज बहादुर की है. इतिहास के पन्नों में दर्ज मांडू (मध्य प्रदेश) स्थित रानी रूपमती का महल एक समय पहले तक बेहद खूबसूरत हुआ करता था, इतना कि कोई भी उसे देखकर अपनी आंखों पर विश्वास ना कर पाए कि क्या वाकई कोई इमारत इतनी बेहतरीन हो सकती है. इस महल के ऊपर मंडप बने हुए थे जहां बैठकर पूरा राज्य नजर आता था.

यह महल 365 मीटर ऊंची और सीधी खड़ी चट्टान पर स्थित है जिसका निर्माण बाज बहादुर ने करवाया था. ऐतिहासिक कहानियों के अनुसार रानी रूपमती सुबह-शाम मंडप पर बैठर सामने बहने वाली खूबसूरत नर्मदा नदी को देखा करती थी. 

महल के नीचे की ओर एक और महल है जिसे बाज बहादुर महल कहा जाता है और इस महल से रानी रूपमती का मंडप बहुत खूबसूरत नजर आता था. ऐसा माना जाता है कि जब रानी मंडप में होती थी, तब बाज बहादुर अपने महल के झरोखे से रूपमती को घंटों निहारा करता था.

सन 1561 की बात है जब मुगल बादशाह अकबर के सेनापति आदम खां ने मांडू पर आक्रमण कर बाजबहादुर को पराजित कर दिया और रानी रूपमती को अगवा कर लिया. रानी रूपमती ने आदम खां के समक्ष समर्पण नहीं किया और अपनी जान दे दी.

इस घटना के बाद रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी अमर हो गई और अकबर ने ही इन दोनों की प्रेम कहानी को लिखित रूप प्रदान करवाया.

ये कहानी हमें भेजा है Subrat das, bishamber Chowk, lalganj, purnea,

अगर आपके पास भी कोई ऐसी ही काहानी हो तो आप हमे Whatsapp कर सकते है हम उसे आपके नाम के साथ अपने ब्लॉग में Publish करेंगे।  Whatsapp no. 9572614108



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व्हाट्सएप पर बिना एडमिन की परमीशन के इस तरह करें ग्रुप ज्वाइन


व्हाट्सएप पर बिना एडमिन की परमीशन के इस तरह करें ग्रुप ज्वाइन

क्या आप व्हाट्सएप के किसी ऐसे ग्रुप में शामिल होना चाहते हैं, जिसके एडमिन को आप नहीं जानते? क्या
आपके दोस्तों ने कोई ग्रुप बनाया है, जिसमें वो आपको एड करना भूल गए हैं?

तो चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है, क्योंकि हम आपको बताएंगे कि बिना एडमिन की परमीशन लिए किसी व्हाट्सएप ग्रुप में खुद को कैसे एड किया जाता है। इस आसान ट्रिक की मदद से आप व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन कर सकते हैं, वो भी एडमिन की परमीशन के बिना।

इसके लिए आपको निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करना होगा।

स्टेप-1
इसके लिए सबसे पहले आपको गूगल प्ले स्टोर में जाकर अपने फोन में मौजूद
व्हाट्सएप को अपडेट करना होगा।

स्टेप-2
इसके बाद गूगल प्ले स्टोर से ही Groups for Whatsapp एप को डाउनलोड कर इंस्टॉल करें।

स्टेप-3
एप इंस्टॉल हो जाने के बाद उसे ओपन करें। इस एप में आप जिस भी कैटेगरी का ग्रुप ज्वाइन करना चाहते हैं वो आपको मिल जाएगा।

स्टेप-4
यहां आपको अपनी भाषा का चुनाव करना होगा। उदाहरण के तौर
पर: हिंदी, अंग्रेजी, मराठी आदि।

स्टेप-5
इसके बाद आपको अपने मनमुताबिक ग्रुप का चुनाव करना है।

स्टेप-6
इसके बाद Join Group पर क्लिक करें।

स्टेप-7
जैसे ही आप क्लिक करेंगे, आप अपने व्हाट्सएप में पहुंच जाएंगे। जिसमें आपको ग्रुप की सारी जानकारी मिल जाएगी। एक बार फिर Join Group पर क्लिक करें।

स्टेप-8
अब आप देख पाएंगे कि आप व्हाट्सएप ग्रुप में ज्वाइन हो चुके हैं। जब आप ग्रुप में जाएंगे तो वहां लिखा होगा कि आपको ग्रुप इनवाइट भेजा गया था, जिसके जरिए आपने ग्रुप ज्वाइन किया है।

होली का त्यौहार किन परम्पराओं और रीतिरिवाज से मनाया जाता है।


होली का त्यौहार किन परम्पराओं और रीतिरिवाज से मनाया जाता है।

भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां स्थान बदलने के साथ ही बोली, परंपराएं व रहन-सहन का तरीका भी बदल जाता है। यहां त्योहार मनाने का अंदाज भी अलग-अलग ही है। होली भी एक ऐसा ही त्योहार है, जो भारत के अलग-अलग प्रदेशों व स्थानों पर विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है। आज इस लेख में हम जानेंगे की भारत के विभिन्न हिस्सों में होली का त्यौहार किन परम्पराओं और रीतिरिवाज से मनाया जाता है।

मालवा अंचल में होली पर होता है भगोरिया उत्सवभगोरिया मध्य प्रदेश के मालवा अंचल (धार, झाबुआ, खरगोन आदि) के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम सेमनाया जाता है। भगोरिया केसमय धार, झाबुआ, खरगोन आदि क्षेत्रों के हाट-बाजार मेले का रूप ले लेते हैं औरहर तरफ फागुन और प्यार का रंग बिखरा नजर आता है। 


भगोरिया हाट-बाजारों में भील समाज के युवक-युवती बेहद सज-धज कर अपने भावी जीवनसाथी को ढूंढने आते हैं। इनमें आपसी रजामंदी जाहिर करने का तरीका भी बेहद निराला होता है।सबसे पहले लड़का लड़की को पान खाने के लिए देता है। यदि लड़की पान खा ले तो लड़की की हां समझी जाती है। इसके बाद लड़का लड़की को लेकर भगोरिया हाट से भाग जाता है और दोनों विवाह कर लेते हैं। इसी तरह यदि लड़का लड़की के गाल पर गुलाबी रंग लगा दे और जवाब में लड़की भी लड़के के गाल पर गुलाबी रंग मल दे तो भी रिश्ता तय माना जाता है।

रोचक है भगोरिया का इतिहासभगोरिया पर लिखी कुछ किताबों के अनुसार राजा भोज के समय लगने वाले हाटों को भगोरिया कहा जाताथा। इस समय दो भील राजाओं कासूमार और बालून ने अपनी राजधानी भागोर में विशाल मेले और हाट का आयोजन करना शुरू किया। धीरे-धीरे आस-पास के भील राजा भी इन्हीं का अनुसरण करने लगे, जिससे हाट और मेलों को भगोरिया कहना शुरू हुआ। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है, इन मेलों में युवक-युवतियां अपनी मर्जी से भागकर शादी करते हैं। इसलिए इसे भगोरिया कहा जाता है।होली पर्व पर बंगाल में निकाली जाती है दोल जात्राबंगाल में होली का स्वरूप पूर्णतया धार्मिक होता है। 


होली के एक दिन पूर्व यहां दोल जात्रा निकाली जाती है। इस दिन महिलाएं लाल किनारी वाली पारंपरिक सफेद साड़ी पहन कर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं और प्रभात फेरी (सुबह निकलने वाला जुलूस) का आयोजन करती हैं। इसमें गाजे-बाजे के साथ, कीर्तन और गीत गाए जाते हैं।दोल शब्द का मतलब झूला होता है। झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्ति रखकरमहिलाएं भक्ति गीत गाती हैं और उनकी पूजा करती हैं। इस दिन अबीर और रंगों से होली खेली जाती है। प्राचीन काल में इस अवसर पर ज़मीदारों की हवेलियों के द्वार आम लोगों के लिए खोल दिये जाते थे। उन हवेलियों में राधा-कृष्ण के मंदिर में पूजा-अर्चना और भोज चलता रहता था। किंतु समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आया है।ऐसे मनाते हैं गोवा में होलीगोवा का नाम सुनते ही मन में बरबस ही समुद्र की लहरें, दूर तक फैला रेतीला तट तथा वहां के खुशनुमा माहौल की याद आ जाती है। 

गोवा में किसी समय पुर्तगालियों का शासन था। जिसके कारण वहां की परंपराएं व त्योहार आज भी प्रभावित नजर आती हैं। होली का उत्सव भी वहां अलग ही अंदाज में मनाया जाता है।गोवा के निवासी होली को कोंकणी में शिमगो या शिमगोत्सव कहते हैं। वे इसअवसर पर वसंत का स्वागत करने के लिए रंग खेलते हैं। इसके बाद भोजन में तीखी मुर्ग या मटन की करी खाते हैं, जिसे शगोटी कहा जाता है। मिठाई भी खाई जाती है। गोवा में शिमगोत्सव की सबसे अनूठी बात पंजिम का वह विशालकाय जलूस है, जो होली के दिन निकाला जाता है।यह जलूस अपने गंतव्य पर पहुँच कर सांस्कृतिक कार्यक्रम में परिवर्तित हो जाता है। इस कार्यक्रम में नाटक और संगीत होते हैं, जिनका विषय साहित्यिक, सांस्कृतिक और पौराणिक होता है। हर जाति और धर्म के लोग इस कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

छत्तीसगढ़ में खेली जाती है ‘होरी’छत्तीसगढ़ में होली को होरी के नाम से जाना जाता है। इस पर्व पर लोक गीतों की परंपरा है। वसंत के आते ही छत्तीसगढ़ की गली-गली में नगाड़े की थाप के साथ राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंग भरे गीत जन-जन के मुंह से बरबस फूटने लगते हैं। किसानों के घरों में होली से पहले ही नियमित रूप से हर दिन पकवान बनने की परंपरा शुरू हो जाती है, जिसे तेलई चढऩा कहते हैं।छत्तीसगढ में लड़कियां विवाह के बाद पहली होली अपने माता-पिता के गांव में ही मनाती है एवं होली के बाद अपने पति के गांव में जाती हैं। इसके कारण होली के समय गांव में नवविवाहित युवतियों की भीड़ रहती है।गांव के चौक-चौपाल में फाग के गीत होली के दिन सुबह सेदेर शाम तक निरंतर चलते हैं। रंग भरी पिचकारियों से बरसते रंगों एवं उड़ते गुलाल में मदमस्त छत्तीसगढ़ के लोग अपने फागुन महाराज को अगले वर्षफिर से आने की न्यौता देते हैं।कुमाऊं मंडल में होली पर सजती हैं महफिलेंउत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की सरोवर नगरी नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली केअवसर पर गीत बैठकी का आयोजन किया जाता है। इसमेंहोली के गीत गाए जाते हैं। 

यहां होली से काफी पहले ही मस्ती और रंग छाने लगता है। इस रंग में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता बल्कि बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है।बरसाने की लट्ठमार होली के बाद अपनी सांस्कृतिक विशेषता के लिए कुमाऊंनी होली को याद किया जाता है। शाम के समय कुमाऊं के घर-घर में बैठक होली की सुरीली महफिलें जमने लगती हैं। गीत बैठकी में होली पर आधारित गीत घर की बैठक में राग-रागिनियोंके साथ हारमोनियम और तबले पर गाए जाते हैं।इन गीतों में मीराबाई से लेकर नज़ीर और बहादुर शाह जफऱ की रचनाएं सुनने को मिलती हैं। गीत बैठकी की महिला महफिलें भी होती हैं। महिलाओं की महफिलों का रुझान लोक गीतों की ओर होता है। होली गाने की ये परंपरा सिर्फ कुमाऊं अंचल में ही देखने को मिलती है।बरसाना में पुरुषों को डंडे से पीटा जाता है

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